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कौन-सी 10 माला के लिए कौन-सा मंत्र जपें और क्या मिलेगा इसका लाभ, जानिए

मंगलवार,जनवरी 28, 2020
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हनुमानजी बहुत ही जागृत देव हैं और वे सभी युगों में साक्षात विद्यमान हैं। वे बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उनकी कृपा आप पर निरंतर बनी रहे। आओ जानते हैं कि किन बातों और संकेतों से पता चलेगा कि रामदूत हनुमानजी की हम पर कृपा है या वह हमसे ...
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घर या मंदिर में पूजा करने के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी है। उन सभी को मिलाकर ही पूजा की जाती है। हालांकि पूजा सामग्री तो बहुत सारी होती है, लेकिन यहां प्रस्तुत है पूजा के 20 प्रतीक वस्तुएं।
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हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। चार बार का अर्थ यह कि यह वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी ...
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माता पार्वती का एक अवतार है देवी भ्रामरी। भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी के रूप में जाना जाता है। देवी महात्म्य में उनका उल्लेख मिलता है। देवी भागवत पुराण में संपूर्ण ब्रह्मांड के जीवों के लिए उसकी महानता दिखाई गई और उनकी सर्वोच्च शक्तियों का वर्णन ...
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महान राजा कौन होता है? जिसमें अपनी प्रजा के लिए दया और सुरक्षा की भावना हो। जिसमें शासन और प्रशासन को संचालित करने और सही एवं गलत को समझने का गुण हो। जिसमें हर तरह की योग्यता हो और जो राजनीतिक के अलावा साहित्य, कला और संगीत में निपूण हो। महानता के ...
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दुनिया में संभवत: ऐसा कोई संविधान नहीं है जिसमें खामियां निकाली जा सकें या जिसकी प्रशंसा नहीं की जा सकें और जिसका दुरुपयोग या सदुपयोग नहीं किया जा सकें। हर काल में गण गौण रहा है और तंत्र प्रधान रहा है। कैसे? किसी को न्याय मिलता है और किसी को न्याय ...
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हिन्दू धर्म में भभूति या भस्म, विभूति आदि को राख भी कहते हैं। हिन्दू धर्म में इसका प्रचलन कब से है यह कहना कठिन है लेकिन कहा जाता है कि भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म रमाते थे। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ के समय में भभूति का प्रचलन व्यापक स्तर पर ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। शुद्ध जल से जहां हम कई तरह के रोग से बच जाते हैं वहीं पवित्र जल से हमारा तन और मन निर्मल हो जाता है। जल को हिंदू धर्म में पवित्र करने वाला माना गया ...
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यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने बहुत समय तक महिलाओं को दीक्षा नहीं दी थी लेकिन महाप्रजापती गौतमी के कारण उन्होंने महिलाओं को भी दीक्षा दी थी। जैन धर्म में भी बहुत समय तक महिलाओं को साध्वी नहीं बनाया जाता था लेकिन महावीर स्वामी ...
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मय दानव को मयासुर भी कहते हैं। यह बहुत ही शक्तिशाली और मायावी शक्तियों से संपन्न था। कहते हैं कि यह आज भी जीवित है। मय दावन के संबंध में 10 ऐसी रोचक बातें जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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घर में माता अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहेगी तब घर में चाहे कितने ही अतिथि आए या आप कहीं भी भंडारा करें आपके अन्न में कमी नहीं आएगी और ना ही अन्न बचेगा। इसके लिए करें ये 10 महत्वपूर्ण कार्य तो माता अन्नपूर्णा रहेगी प्रसन्न।
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हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान, स्थान विशेष या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा ...
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पौराणिक मान्यता और प्रचलित धारणा के अनुसार गुड़ और चने के प्रसाद के प्रचलन की कुछ कथाएं प्रचलित हैं। उन्हीं कथाओं में से एक कथा यहां प्रस्तुत है।
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संस्कार का सामान्य अर्थ है-किसी को सुसंस्कृत करना या शुद्ध करके उपयुक्त बनाना। संस्कार से ही हमारा सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन पुष्ट होता है और हम सभ्य कहलाते हैं। संस्कार विरुद्ध आचरण असभ्यता की निशानी है। हिन्दू धर्म में कम से कम 32 तरह के ...
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धर्म युद्ध को क्रूसेड या जिहाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। विश्व इतिहास में महाभारत के युद्ध को धर्मयुद्ध के नाम से जाना जाता है।
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बहुत से लोग मंदिर जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम रहता है कि मंदिर में प्रवेश के क्या नियम है और मंदिर से बाहर निकलते वक्त क्यों कुछ देर के लिए सीढ़ियों पर बैठा जाता है। आओ जानते हैं प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक की प्रक्रिया के सामान्य आम 9
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18 सिद्धों में से एक बोगर एक तमिल सिद्धार थे जो 550 से 300 ईसा पूर्व के बीच हुए थे। बोगर ने एक किताब 'बोगर 7000' लिखी है। बोगर 7000 में 7000 गाने हैं, और इसमें सिद्ध चिकित्सा के बारे में विवरण है।
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ज्योतिष की एक मान्यता अनुसार प्रथम भाव से खानदानी दोष देह पीड़ा, द्वितीय भाव आकाश देवी, तृतीय भाव अग्नि दोष, चतुर्थ भाव प्रेत दोष, पंचम भाव देवी-देवताओं का दोष, छठा भाव ग्रह दोष, सातवां भाव लक्ष्मी दोष, आठवां भाव नाग दोष, नवम भाव धर्म स्थान दोष, दशम ...
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करीब 58 दिनों तक मृत्यु शैया पर लेटे रहने के बाद जब सूर्य उत्तरायण हो गया तब माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म पितामह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसीलिए यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। आओ जानते हैं भीष्म पितामह के बारे में 10 रोचक तथ्य।
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