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गुप्त नवरात्रि की देवियां, जानिए महत्व

रविवार,जनवरी 26, 2020
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हिन्दू धर्म में भभूति या भस्म, विभूति आदि को राख भी कहते हैं। हिन्दू धर्म में इसका प्रचलन कब से है यह कहना कठिन है लेकिन कहा जाता है कि भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म रमाते थे। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ के समय में भभूति का प्रचलन व्यापक स्तर पर ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। शुद्ध जल से जहां हम कई तरह के रोग से बच जाते हैं वहीं पवित्र जल से हमारा तन और मन निर्मल हो जाता है। जल को हिंदू धर्म में पवित्र करने वाला माना गया ...
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यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने बहुत समय तक महिलाओं को दीक्षा नहीं दी थी लेकिन महाप्रजापती गौतमी के कारण उन्होंने महिलाओं को भी दीक्षा दी थी। जैन धर्म में भी बहुत समय तक महिलाओं को साध्वी नहीं बनाया जाता था लेकिन महावीर स्वामी ...
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घर में माता अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहेगी तब घर में चाहे कितने ही अतिथि आए या आप कहीं भी भंडारा करें आपके अन्न में कमी नहीं आएगी और ना ही अन्न बचेगा। इसके लिए करें ये 10 महत्वपूर्ण कार्य तो माता अन्नपूर्णा रहेगी प्रसन्न।
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हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान, स्थान विशेष या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा ...
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संस्कार का सामान्य अर्थ है-किसी को सुसंस्कृत करना या शुद्ध करके उपयुक्त बनाना। संस्कार से ही हमारा सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन पुष्ट होता है और हम सभ्य कहलाते हैं। संस्कार विरुद्ध आचरण असभ्यता की निशानी है। हिन्दू धर्म में कम से कम 32 तरह के ...
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बहुत से लोग मंदिर जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम रहता है कि मंदिर में प्रवेश के क्या नियम है और मंदिर से बाहर निकलते वक्त क्यों कुछ देर के लिए सीढ़ियों पर बैठा जाता है। आओ जानते हैं प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक की प्रक्रिया के सामान्य आम 9
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ज्योतिष की एक मान्यता अनुसार प्रथम भाव से खानदानी दोष देह पीड़ा, द्वितीय भाव आकाश देवी, तृतीय भाव अग्नि दोष, चतुर्थ भाव प्रेत दोष, पंचम भाव देवी-देवताओं का दोष, छठा भाव ग्रह दोष, सातवां भाव लक्ष्मी दोष, आठवां भाव नाग दोष, नवम भाव धर्म स्थान दोष, दशम ...
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सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहते हैं। वर्ष में 12 संक्रांतियां होती है जिसमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में ...
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आप इसे मानें या न मानें। मान्यता अनुसार कुछ खास दिनों में कुछ खास कार्य करने से बचना चाहिए। ये कुछ खास दिन यहां प्रस्तुत हैं। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि तेरस, चौदस, पूर्णिमा, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 5 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है, क्योंकि ...
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आश्रम व्यवस्था को जीवन या उम्र के चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला विद्यार्थी जीवन, दूसरा दांपत्य या गृहस्थ जीवन, तीसरा शिक्षात्मक या आचार्य का जीवन और चौथा संन्यासी का जीवन। उक्त चार को नाम दिया गया ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास।
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जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं। 'उपनयन' का अर्थ है, 'पास या सन्निकट ले जाना।' किसके पास? ब्रह्म (ईश्वर) और ज्ञान के पास ले जाना। आपने देखा होगा कि बहुत से लोग बाएं कांधे ...
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धूप कई प्रकार की होती है। तंत्रसार के अनुसार अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गुल ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं।
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हिन्दू धर्म में सफेद वस्त्र का बहुत महत्व है। सफेद रंग हर तरह से शुभ माना गया है, लेकिन वक्त के साथ लोगों ने इस रंग का मांगलिक कार्यों में इस्तेमाल बंद कर दिया। हालांकि प्राचीनकाल में सभी तरह के मांगलिक कार्यों में इस रंग के वस्त्रों का उपयोग होता ...
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हिन्दू पंचांग के चंद्रमास के अनुसार वर्ष का ग्यारहवां महीना है माघ। पौष के बाद माघ माह प्रारंभ होता है। पुराणों में माघ मास के महात्म्य का वर्णन मिलता है। इसका नाम माघ इसलिए रखा गया क्योंकि यह मघा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा से प्रारंभ होता है। चंद्रमास ...
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हिन्दू शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार धन, संपत्ति आदि में बरकद रखने के लिए कुछ नियम और उपाय बताएं गए हैं यदि लोग उन नियम और उपायों का पालन नहीं करते हैं तो ऐसे लोगों का धन जेलखाना, पागलखाना या दवाखाने में ही चला जाता है। उक्त में बर्बाद नहीं हुआ तो ...
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अक्सर मंदिर या घर के पूजाघर में हमने देखा होगा गरुड़ घंटी को। मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। यह घंटे या घंटियां 4 प्रकार की होती हैं:- 1.गरूड़ घंटी, 2.द्वार घंटी, 3.हाथ घंटी और 4.घंटा।
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हिन्दू धर्म में भगवा, केसरिया, लाल और पीले रंग का अलग-अलग महत्व है। रंगों से आप जान सकते हैं कि कौन सा संन्यासी क्या है। केसरिया रंग त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का प्रतीक है। सनातन धर्म में केसरिया रंग उन साधु-संन्यासियों द्वारा धारण किया ...
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मनुष्य जन्म लेता है तो उसकी मृत्यु तक कई तरह के ऋण, पाप, पुण्य उसका पीछा करते रहते हैं। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि तीन तरह के ऋण को चुकता कर देने से मनुष्य को बहुत से पापों और संकटों से छुटकारा मिल जाता है। कहीं कहीं चार तरह के ऋण बताए गए ...
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