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26 जनवरी के बाद भी गणतंत्र पर सोचें हम

मंगलवार,जनवरी 28, 2020
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26 जनवरी को ही हमारे गणतंत्र का जन्म हुआ और भारत देश एक गणतांत्रिक देश बना। हमारे देश को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को ही मिल गई थी, लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना और भारत देश में नए संविधान के जरिए कानून का राज स्थापित हुआ
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अखण्डता शब्द का औचित्य बनता है ,किन्तु ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्द क्यों और किस विवशता में जोड़े गए?
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हमारे राष्‍ट्र गान के बारे में बहुत से दिलचस्‍प तथ्‍य हैं, जिनके बारे में जानकर आपका ज्ञान बढेगा।
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तिरंगे का बहुत ज्‍यादा महत्‍व होता है। सभी के हाथों में तिरंगा लहराता रहता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं तिरंगे के बारे में ये दिलचस्‍प बातें।
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नदी बहती है तो स्वच्छ, सुंदर और पवित्र लगती है लेकिन रुक जाती है तो उसका पानी सड़ांध मारने लगता है। एक प्रसिद्ध और महान राजा ने पहाड़ से गिरे पत्थर को सड़क पर से हटाकर सड़क के किनारे रखवा दिया था।सदियों बाद जब सड़क को नई बनाकर चौड़ा करने की बात हुई ...
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दुनिया में संभवत: ऐसा कोई संविधान नहीं है जिसमें खामियां निकाली जा सकें या जिसकी प्रशंसा नहीं की जा सकें और जिसका दुरुपयोग या सदुपयोग नहीं किया जा सकें। हर काल में गण गौण रहा है और तंत्र प्रधान रहा है। कैसे? किसी को न्याय मिलता है और किसी को न्याय ...
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भारत के लोगों ने भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए एक संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मसमर्पित किया। भारत के लोगों ने इस लोकतंत्रात्मक गणराज्य और संविधान से अपेक्षा की कि वह भारतवर्ष के समस्त नागरिकों को ...
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गणतंत्र के इतने वर्षों में, क्या खोया क्या पाया है....खोने की तो फिक्र नहीं, पाने की चाह सब रखते हैं...सदियों के तप के बाद मिली, आज़ादी की नेमत हमको..
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भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो तीन रंगों - केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना अशोक चक्र है।
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26 जनवरी सन 1950 को हमारे देश को पूर्ण स्वायत्त गणराज्य घोषित किया गया था और इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को भारत का गणतंत्र दिवस मनाया जाता है
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता जिस मुल्क की सरहद की निगेहबान हैं आंखें हर तरह के जज्बात का, ऐलान हैं आंखें
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राष्ट्रीयता से ओतप्रोत इस राष्ट्रगीत को बंगाली साहित्यकार और नोबल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने दिसंबर 1911 में लिखा जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता सालाना अधिवेशन में यानी 27 दिसंबर 1911 को गाया गया।
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इसी अवसर पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती हैं। हमें अवसर मिलता हैं हमारे देश के प्रति हमारी भावनाओं को बहुत ही खूबसूरती के साथ लोगों के समक्ष पेश करने का जिसके लिए हम सभी में उत्साह होता हैं....
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गणतंत्र दिवस दिन वे निराले स्वर्णाक्षरों में है जिन्हें इतिहास संभाले इनके लिए हर भारतीय मन में है सम्मान इनने ही दिए हमको अंधेरों में उजाले फूले फले समृद्ध हो
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इस अवसर पर हम आपको पढवाते हैं कुछ कविताएं जो खासतौर से गणतंत्र दिवस को ध्‍यान में रखकर लिखी गई हैं।
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गणतंत्र दिवस को लेकर कुछ बेहद ही दिलचस्‍प तथ्‍य हैं जो शायद ही आप जानते होंगे
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यानी जब भी देशसेवा का जिक्र हो तो उसका सीधा सा अर्थ आम नागरिक सेना के जवान से ही लेता है। ये सही है कि सैनिक देश की सेवा करते हैं वे सीमा प्रहरी भी हैं।
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भारत की कुछ विशेषताएं ऐसी भी हैं जो पूरी दुनिया में इसे सबसे अलग, आकर्षक और खूबसूरत बनाती हैं। जानिए ऐसी ही 5 विशेषताएं...जिन्हें जानने के बाद आप फिर कह उठेंगे, सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा...
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मंच पर पहुंचकर आप सबसे पहले तो सभा में उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन करें, अपना परिचय दें, अपना नाम तथा आप कौन-सी कक्षा में पढ़ते हैं, यह बताएं। अपने स्वयं के स्कूल के अलावा यदि किसी अन्य आयोजन में बोल रहे हैं तो अपने विद्यालय या कॉलेज का
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