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550 वां प्रकाश पर्व : स्वर्ण मंदिर यानी गोल्डन टेम्पल के 5 रहस्य

मंगलवार,नवंबर 12, 2019
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गुरु नानक देव के अनमोल दोहे जो बदल देंगे आपकी जिंदगी
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पंज को हिन्दी में पांच कहते हैं अर्थात 'पांच प्यारे।' सिख धर्म में पंज प्यारे कौन थे यह बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे। जो नहीं जानते है उनके लिए जानना जरूरी है। कहते हैं कि 'पंज प्यारे' बहुत ही बहादुर पांच लोग होते हैं। आओ जानते हैं कि 'पंज प्यारे' ...
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गुरुनानक का आविर्भाव जिन दिनों 1हुआ, उन दिनों मानव जाति अंधकार-युग में अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। उसे सच्चा रास्ता दिखाने के लिए गुरुनानकदेवजी ने यात्राए कीं।
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12 नवंबर 2019 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक देव साहिब का प्रकाशोत्‍सव मनाया जाएगा। गुरु नानक देव का प्रकाशोत्‍सव पर्व पवित्र भावनाओं के साथ मनाया जाने वाला उत्‍सव है।
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लंगर के कई अर्थ है। जहाज, नाव आदि में सफर करने वाले लोग अक्सर लंगर डालकर भोजन आदि कर विश्राम करते थे। दरअसल, लंगर लोहे का वह बहुत बड़ा कांटा जिसे नदी या समुद्र में गिरा देने पर नाव या जहाज एक ही स्थान पर ठहरा रहता है। संभवत: यही से यह शब्द प्रेरित ...
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गुरुनानक देव के चेहरे पर बाल्यकाल से ही अद्भुत तेज दिखाई देता था। उनका जन्म लाहौर के पास तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ।
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सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी के चार शिष्य थे। यह चारों ही हमेशा बाबाजी के साथ रहा करते थे। बाबाजी ने अपनी लगभग सभी उदासियां अपने इन चार साथियों के साथ पूरी की थी। इन चारों के नाम हैं- मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ पुरी की थी।
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भादों की अमावस की धुप अंधेरी रात में बादलों की डरावनी गड़गड़ाहट, बिजली की कौंध और वर्षा के झोंके के बीच जबकि पूरा गांव नींद में निमग्न था,
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12 नवंबर को श्री गुरुनानक देवजी का 550वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। सिख संप्रदाय में इस पर्व को मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। इस बार श्री गुरुनानक देवजी के प्रकाश पर्व को देखते हुए पूरे उत्साह के साथ समाज, संगत के लोग भव्य ...
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गुरु नानक देव का जन्म 15वीं सदी में उत्तरी पंजाब के तलवंडी गांव के एक हिन्दू परिवार में हुआ था। किंतु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है, जो अक्टूबर-नवंबर में दीपावली के 15 दिन बाद पड़ती है।
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गुरुनानक देवजी का जन्म पंजाब के राएभोए के तलवंडी नामक स्थान पर हुआ। यह स्थान अब पाकिस्तान में है। उन्होंने उनके जीवन के ज्यादातर समय सुल्तानपुर लोधी और करतारपुर में बिताया। यहां कई गुरुद्वारे हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत और पाकिस्तान में उन्होंने ...
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सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी अपने चार साथी मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। ये चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे। कहते हैं कि 1500 से 1524 तक इन्होंने पांच यात्रा चक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और ...
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सिख धर्म के 10 गुरु हुए हैं प्रथम गुरु गुरुनानक देवजी और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी थे। सिख धर्म ने देश और धर्म की रक्षार्थ अपने प्राणों की आहुति देकर इस देख की आक्रांताओं से रक्षा की है। इसी क्रम ने उन्होंने पांच तख्तों को स्थापित किया था। आओ ...
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सिख धर्म के संस्थापक, महान दार्शनिक गुरु, गुरु नानक देव जी से आप सभी परिचित है। आइए जानते हैं उनके 10 खास सिद्धांत...
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एक बार गुरु नानक बगदाद गए हुए थे। वहां का शासक बड़ा ही अत्याचारी था। वह जनता को कष्ट तो देता ही था, उनकी संपत्ति लूटकर अपने खजाने में जमा भी कर लिया करता था। उसे जब मालूम हुआ कि हिंदुस्तान से कोई साधु पुरुष आया है तो वह नानकजी से मिलने उनके पास ...
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गुरु नानक देव जी मध्यप्रदेश में संभवतः महाराष्ट्र के नासिक शहर से होते हुए बुरहानपुर आए थे। बुरहानपुर में वे ताप्ती नदी के किनारे ठहरे। वहां से वे ओंकारेश्वर गए और ओंकारेश्वर से इंदौर।
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कहा जाता है कि गुरु नानकदेवजी का आगमन ऐसे युग में हुआ जो इस देश के इतिहास के सबसे अंधेरे युगों में था।
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समाज में समानता का नारा देने के लिए उन्होंने कहा कि ईश्वर हमारा पिता है और हम सब उसके बच्चे हैं और पिता की निगाह में छोटा-बड़ा कोई नहीं होता। वही हमें पैदा करता है और हमारे पेट भरने के लिए खाना भेजता है। गुरु नानक देव के यह 8 दोहे आपके लिए...
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गुरुनानकदेवजी का अवतरण संवत्‌ 1526 में कार्तिक पूर्णिमा को ननकाना साहिब में हुआ। सतगुरुजी की महानता के दर्शन बचपन से ही दिखने लगे थे।
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