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बच्चों के बहाने

शनिवार,नवंबर 15, 2014
Malala
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मुझे याद आता है आज से लगभग 35 साल पहले। दिवाली पर घर की बहुत याद आती थी। दिवाली के साथ जुड़े थे सारे सगे-संबंधी, दीये की कतारों से सजी घरों की बिन्नि‍यां और खिड़कियां, मिठाइयों से तनातन भरी रंग-बिरंगी हलवाइयों की दुकानें। दिवाली के बहुत दिन पहले से ...
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एन्‍थ्रोपालजिस्ट मार्गरेट मीड ने कहा था कि पहले जब कोई दादी गोद में बिठाए अपने पोते के भविष्य के बारे में सोचती थी तो बहुत कुछ अपने वर्तमान जैसा भविष्य की परिकल्पना में होता था। जो ले-देकर सही भी था। पर आज जब कोई दादी अपने गोद में बैठे पोते की भावी ...
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अस्‍पताल किसी के लिए भी सुंदर और सुखद जगह नहीं होते। जहां तक हो सके, हम सब की यही ख्‍वाहिश होगी कि खुदा करे अस्‍पताल के चक्‍कर न ही लगें। पर हम सब यह भी जानते हैं कि कभी न कभी चक्‍कर तो लगाना ही पड़ता है। शरीर चीज ही ऐसी है कि कोई न कोई रोग तो लगना ...
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पिछले कुछ सालों में मीडिया की आज़ादी को जितनी बहस हुई है उतनी पहले कभी नहीं हुई। मीडिया ने इन सालों में अपनी आज़ादी से अगर समझौता किया तो उसके पीछे बहुत बार सरकारों या राजनीतिक दलों का दवाब था। तो कभी पैसे का प्रलोभन या दोनों का ही मिल-जुला असर। इस ...
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London Diary : Mind the Gap

गुरुवार,जून 5, 2014
Walk down the streets of London, and that is one thing you can do when here , anywhere that you fancy and each strand will tell a story.
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विकास के इस चरण पर पहुंच, एक ओर तो हम तकनीकी उपकरणों के इतने आदी हो गए हैं कि उनके बिना अपनी हस्ती ही डोलती हुई नजर आती है। दूसरी ओर जलवायु में आने वाले भारी परिवर्तन बार-बार हमे चेतावनी दे डालते हैं कि क्या हम अपनी दुनिया को सही दिशा में ले जा रहे ...
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