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क्यों 7 पुत्रों को जल में बहा दिया था गंगा ने और 8वें को नहीं बहा पाई?

गुरुवार,जनवरी 16, 2020
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महाभारत और पुराणों में यवनों का उल्लेख मिलता है। ये यवन कौन थे इस संबंध में पुराण, महाभारत में कुछ और ही उल्लेख मिलता है जबकि भारतीय इतिहास के जानकार कुछ और ही कहते हैं। यहां प्रस्तुत है पुराण और महाभारत के अनुसार यवन के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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महाभारत काल में यहा युद्ध में कौरव, पांडव या अन्य के कुछ पुत्र बहुत चर्चा में रहे हैं। आज भी उन पुत्रों की चर्चा होती है। आओ जानते हैं उन्हीं में से 8 पुत्रों का परिचय।
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महाभारत काल में ऐसे कई लोग रहे हैं जिनको हम मजेदार, रोचक या रोमांचक कह सकते हैं, लेकिन जब हम मात्र 5 का चयन करते हैं तो आपको भी जानकर हैरानी होगी और आप भी इससे सहमत होंगे। हालांकि हर व्यक्ति की नजर में अलग अलग किरदार हो सकते हैं। यहां हमने सबसे रोचक ...
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भगवान श्रीकृष्ण का महिलाओं के प्रति विशेष अनुराग था और महिलाएं भी उनके प्रति विशेष अनुराग रखती थीं। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला यह कि वे महिलाओं की संवेदना और उनकी भावनाओं को समझते थे, दूसरा यह कि वे उनका विशेष सम्मान करते थे, तीसरा यह कि वे उनकी ...
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हिन्दू धर्म के एकमात्र धर्मग्रंथ है वेद। वेदों के चार भाग हैं- ऋग, यजु, साम और अथर्व। वेदों के सार को उपनिषद कहते हैं और उपनिषदों का सार या निचोड़ गीता में हैं। उपनिषदों की संख्या 1000 से अधिक है उसमें भी 108 प्रमुख हैं। किसी के पास इतना समय नहीं है ...
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महाभारत में कौरव और पांडवों के बीच लड़ाई हुई थी, लेकिन कौरव और पांडव दोनों ही कुरुवंश से नहीं थे। वैसे देखा जाए तो कुरुवंश का अंतिम व्यक्ति भीष्म पितामह ही थे। लेकिन पुराणों के अनुसार उस काल का अंतिम शासक निचक्षु था। पुराणों के अनुसार हस्तिनापुर ...
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गांधारी जब गर्भवती थी तब धृतराष्ट्र की सेवा आदि कार्य करने के लिए एक वणिक वर्ग की दासी रखी गई थी। धृतराष्ट्र ने उस दासी से ही सहवास कर लिया। सहवास के कारण दासी भी गर्भवती हो गई। उस दासी से एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसका नाम युयुत्सु रखा गया। उल्लेखनीय ...
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भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व बहुत ही रहस्यमयी है। उन्होंने गीता के रूप में संसार को जो ज्ञान दिया है उसमें धर्म, दर्शन और अध्यात्म की सभी धाराएं समाहित है। आओ जानते हैं उनकी 3 माताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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अर्जुन के 3 पुत्र थे। द्रौपदी से जन्मे अर्जुन के पुत्र का नाम श्रुतकर्मा था। द्रौपदी के अलावा अर्जुन की सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा नामक 3 और पत्नियां थीं। सुभद्रा से अभिमन्यु, उलूपी से इरावन, चित्रांगदा से बभ्रुवाहन नामक पुत्रों का जन्म हुआ। कहते ...
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कलियुग कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी तिथि को पांडव पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। पांडु के पुत्र होने के कारण महाभारत के पांचों योद्धाओं को पांडव कहा जाता था। आज इनके जन्म के संबंध में जानते हैं रोचक कथा।
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महाभारत में धृतराष्ट्र की भूमिका बहुत ही अजब थी। कई पाप किए जिसका परिणाम भी छेलना पड़ा। सबसे बड़ा परिणामय यह कि प्रारब्ध के चलते अंधा पैदा होना पड़ा। दरअसल धृतराष्ट्र ऋषि वेद व्यास के पुत्र थे। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे? तो आओ जाने हैं धृतराष्ट्र के ...
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रामायण काल में दीपोत्सव मनाए जाने का जिक्र मिलता है। राम के अयोध्या आगमन के दौरान दीपोत्सव मनाया गया था। लेकिन क्या महाभारत काल में भी दिवाली मनाई जाती थी? इस संबंध में दो घटनाएं जुड़ी हुई है।
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वेदों के पितृयज्ञ को ही पुराणों में विस्तार मिला और उसे श्राद्ध कहा जाने लगा। पितृपक्ष तो आदिकाल से ही रहता आया है, लेकिन जब से इस पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा का प्रारंभ हुआ तब से अब तक इस परंपरा में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। यह ...
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अश्‍वत्थामा का जन्म अंगिरा गोत्र के भरद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोणाचार्य के यहां हुआ था। उनकी माता ऋषि शरद्वान की पुत्री कृपी थीं। तपस्यारत द्रोण ने पितरों की आज्ञा से सन्तान प्राप्‍ति हेतु कृपी से विवाह किया।
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चारों वोदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का सार गीता है। गीता ही प्रमुख धर्मग्रंथ है। गीता में कहा गया है कि शुक्ल पक्ष में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति वापस नहीं लौटता और कृष्ण पक्ष में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति वापस लौट आता है अर्थात उसे फिर से जन्म ...
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सचमुच यह बहुत अजीब सवाल हो सकता है, क्योंकि राम की नीति और कृष्ण की नीति में बहुत अंतर है। श्रीकृष्ण अपने लक्ष्य को साम, दाम, दंड और भेद सभी तरह से हासिल करने का प्रयास करते हैं लेकिन राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम है। उन्होंने कभी भी अनीति का सहारा ...
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भगवान श्रीकृष्ण पूर्णावतार थे। उन्होंने अपने जीवन में कई चमत्कार किए। उन्होंने अपने जीवन में कई लोगों की जान ही नहीं बचाई जबकि उन्होंने आठ मृतकों को जीवित कर दिया था।
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महाभारत में द्रौपदी एक अहम् किरदार है। द्रौपदी के जीवन और चरित्र को समझना बहुत ही कठिन है। उन्हें तो सिर्फ कृष्ण ही समझ सकते थे। द्रौपदी श्रीकृष्ण की मित्र थी। मित्र ही मित्र को समझ सकता है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने 4 ऐसी गलतियां की थी ...
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एकलव्य के संबंध में बहुत भ्रम फैला हुआ है। एकलव्य एक राजपुत्र थे, भील थे, आदिवासी थे, निषाद थे या कि और कोई? इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जाती है। उनमें से मुख्‍य तीन बातों पर आज भी रहस्य बना हुआ है।
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