लौटा बचपन का प्यार...

ND|
- राजश्री

स्नेहा जब छः साल की थी। तभी उसके पिता का तबादला हो गया। तबादले से एक दिन पूर्व ही वेलेंटाइन डे था। उसी के क्लास में उसका एक दोस्त रवि पढ़ता था। स्नेहा और रवि दोनों एक-दूसरे का बहुत पसंद करते थे।

दोनों को साथ-साथ पढ़ना, साथ-साथ खेलना दोनों को बहुत अच्छा लगता था। लेकिन अचानक हुए इस तबादले से दोनों अलग-अलग हो गए। स्नेहा के पिता का तबादला पंजाब के एक छोटे से कस्बे में हो गया।

स्नेहा भी अपने पापा-मम्मी के साथ चली गई। वहाँ पर उसका जीना मुश्किल हो गया। क्या करें ! कहीं मन ही नहीं लगता था। स्नेहा जो हर समय रवि के विचारों में खोई रहती थी। उसी की याद में वह हर समय पत्र लिखती रहती थी। लेकिन पता न होने के कारण वह उन प्रेम पत्रों को अपने पास ही इकट्ठा करती थी। इसी के चलते वह पूरे 21 साल की हो गई। अब वहपढ़-लिखकर होशियार हो चुकी थी। लेकिन फिर भी उसके मन की यादों ने इतने साल बाद भी रवि को भुलाया नहीं था। उसकी निगाहें हर समय रवि को ढूँढ़ती रहती।
करीब साल भर पहले ही उसको एक बड़ी कंपनी में जॉब मिल गई। एक दिन अचानक रवि भी उसी कंपनी में जॉब अप्लाय करने के लिए वहाँ पहुँचा। रवि को देखकर रिसेप्शन पर बैठी स्नेहा को मन-ही-मन कुछ महसूस हुआ। बड़े होने के साथ-साथ दोनों की शक्ल-सूरत में काफी अंतर आ गया था। लेकिन कहते हैं न कि मन के किसी कोने में छूटी कोई आहट कभी अचानक चौंक जाती है। स्नेहा के साथ भी वैसा ही हुआ।

विज्ञापन
Traveling to UK? Check MOT of car before you buy or Lease with checkmot.com®
 

और भी पढ़ें :