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Delhi fire : आग बुझाने के लिए इंतजाम नाकाफी, आखिर कब जागेंगे हम

रविवार,दिसंबर 8, 2019
Delhi fire
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जिस देश में आप रहते हैं वो किसी सेवंटी एमएम की स्‍क्रीन नहीं है। ये वो जगह नहीं है, जहां मजलूम अपने जालिम को घसीटकर लाएगा और उसी जगह पर गोली मारेगा, जहां जालिम ने उसके पिता या भाई की हत्‍या की थी या उसकी बहन का ब्‍लाऊज फाड़कर उसका बलात्‍कार किया था। ...
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मनुष्य अपने आपको कितना ही ज्ञानी समझे किंतु वह अपनी बुद्धि के इस्तेमाल से अभी तक केवल अपने जीवित रहने की क्षमताओं का विकास ही कर पाया है या फिर प्रकृति जिन नियमों का पालन करती है, उनको समझने का प्रयास कर रहा है। साथ ही मनुष्य ने अपनी समझ से जीने के ...
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महाराष्ट्र में तीन होटलों में रुकी थी तीन बारातें। बारातियों से बाहर वालों के मिलने के लाले थे || क्योंकि अन्दर की सरगर्मी थी गोपनीय, पर्दे में,
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समाचार देख सुनकर इससे ज्यादा प्रसन्नता पहले कभी नहीं हुई..। रुपहले पर्दे पर स्त्री के शीलभंग करने वाले खलनायक को जब हीरो मारता है तो ये नाटक है,जानते हुए भी दिल को सूकून मिलता है..। तो ये तो वास्तविकता थी कि जीती जागती मासूम दिशा को दो बार कत्ल किया ...
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अगर किसी लड़की के साथ गैंग रेप कर उसे जिंदा जला देना पाशविक और कानूनी दायरे से बाहर है, तो उसके आरोपियों को अदालत भेजे बगैर उनके एनकांउटर और पनिश्‍मेंट को एंजॉय करना सोशल आर्गेज्‍म ही है। इंसाफ का यह एनकांउटर दरअसल पब्‍लिक ऑर्गज्‍म है।
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ये जानना बहुत जरूरी है की आदमी एक औरत से इतनी नफरत क्यों करता है कि बलात्कार कर जला देता है। मार डालता है?
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सोशल मीडिया और जहां- तहां बहस छिड़ी हुई है कि हैदराबाद केस में पुलिस ने जो कदम उठाया, क्या उसे सही ठहराया जाना चाहिए। सच कहूं , तो पीड़िता को न्याय जल्द से जल्द मिलना चाहिए था पर इस तरीक़े से मैं सहमत नहीं होती, क्योंकि इस तरह तो पुलिस की निरंकुशता ...
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हैदराबाद के दिशा सामूहिक दुष्कृत्य के चारों आरोपियों को पुलिस ने शादनगर के पास एनकाउंटर कर दिया है। सुबह-सुबह की यह खबर जाने क्यों राहत देती सी लगी। किसी के मारे जाने पर खुशी मनाना यूं तो हमारा संस्कार नहीं है।
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मैं महसूस नहीं कर सकती वह व्यथा,पीड़ा और वेदना जो शरीर के जलने पर होती है क्योंकि मैं तो माचिस की एक तीली भर से लगने पर चीख उठती हूं...मैं क्या जानूं तेजाब क्या होता है? कहां से लाऊं जहरीले शब्द, खौलते हुए वाक्य, उबलते हुए संवाद... एक स्त्री और फिर ...
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कहानी : यू नेवर नो...

मंगलवार,दिसंबर 3, 2019
हाथ में पेढ़े लिए मेघा दीदी के घर की सीढ़ियां चढ़ते हुए सारा अतीत अमोल के स्मृतिपटल पर तैर रहा था। दसवीं की परीक्षा के बाद वह दुर्घटना!
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स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 4 दिसंबर 1894 को उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था।
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इंसान को तमाम तरह की सुख-सुविधाओं के साजो-सामान देने वाले सतर्कताविहीन या कि गैरजिम्मेदाराना विकास कितना मारक हो सकता है, इसकी जो मिसाल भोपाल में साढ़े तीन दशक पहले देखने को मिली थी, उसे वहां अभी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग रूपों में देखा जा सकता है।
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अंततः मुबारक महाराष्ट्र को एक तिमुही सरकार। एक राजनीतिक मंडप जिसके हैं तीन मुख्य द्वार ||
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भोपाल गैस त्रासदी पर कविता- आर्तनाद, चीखें अंधे, बहरे चमड़ी उधड़े चेहरे लाखों मासूमों को जो आज भी
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हमने बलात्कार को श्रेणियों में बांट दिया है - एक सामान्य बलात्कार दूसरा वीभत्स या ब्रूटल; एक हाइप्ड रेप तो दूसरा नॉन-हाइप्ड रेप।
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भारत का मीडिया महाराष्ट्र की राजनीतिक नौटंकी में उलझा रहा और उधर श्रीलंका के आम चुनावों में सत्ता पलट हो गई। गोटबाया राजपक्षे ने 18 नवंबर को श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ भी ले ली। शपथ लेते ही उन्होंने अपने भाई महिंदा राजपक्षे को ...
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स्कूल जाते बच्चों की मां, उठ जाती है बड़ा पछिलहरा में, कर देती है बच्चों का टिफिन तैयार , उन्हें नहा-धुला और दुलार कर बिठा देती हैं उन्हें बस रिक्शे और ठेले पर
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सोचती हूं क्या इस देश की सूनी सड़क पर स्कूटी का खराब होना इतना बड़ा अपराध है कि अधजली लाश बनकर पड़े रहने का खामियाजा भुगतना पड़े?
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पंचतंत्र में चालाक बंदर और मूर्ख मगरमच्छ की एक कहानी है, जिसमें बंदर अपना कलेजा खाने को आतुर मगरमच्छ से अपनी जान बचाने के लिए कहता है कि मैं तो अपना कलेजा नदी किनारे जामुन के पेड पर संभालकर रखता हूं और वहां से लाकर ही तुम्हारी इच्छा पूरी कर सकता
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