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छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती : पढ़ें गुरु-शिष्य की प्रेरक कहानी

शनिवार,फ़रवरी 15, 2020
shivaji n ramdas
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भारत का रंग-रंगीला त्योहार होली जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है।
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महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे समर्थ स्वामी रामदास। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। इतना ही नहीं उनके विचारों पर अमल करने से आप स्वयं अपने जीवन की राह आसान बना लेंगे।
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स्कूल के पीछे नदी में प्रिंसिपल डूब रहे थे पप्पू ने देखा और जोर-जोर से चिल्लाते हुए भागा कल छुट्टी है रे..... कल छुट्टी है.....
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शीत लहर के पंछी आ गए, रुई के पंखे लगा-लगा कर। चारों तरफ धुंध दिन में भी, कुछ भी पड़ता नहीं दिखाई।
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कड़क ठंड है कहीं न जाएं। घर में रहकर मौज मनाएं। सूरज जब हड़ताल पर बैठा, पाएं न हम भी क्यों छुट्टी।
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सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। उनकी माता का नाम वरद सुंदरी था, वे कवयित्री थीं और बंगला में लिखती थीं।
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बाल कविता : समय का मूल्य

बुधवार,फ़रवरी 12, 2020
रोज सुबह तड़के उठकर अब, सैर-सपाटे करना है। बड़े लगन से मेहनत करके,
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न से नफरत झ से झगड़ा कभी न पढ़ना भाई।
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मुन्ना हंसता मुन्नी हंसती, रोज लगाते खूब ठहाके। लगता खुशियों के सरवर में, अभी आए हैं नहा-नहाके।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था।
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मैंने नहीं सोचा था कि जि‍स रात में पकड़ा गया उस रात जि‍स जोड़े की मैंने शादी कराई उनके साथ प्‍यार भी हमेशा-हमेशा के लि‍ए आजाद हो जाएगा।
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रज्जो ने सज्जो के दोनों, सज्जो ने रज्जो के दोनों, पकड़े कान।
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दीना इस कक्षा में पहली श्रेणी तो लेकर ही आए, साथ में नेक कर्म से अपने वो तो सबका आदर पाए।
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वेलेंटइन डे की शुरुआत अमेरिका में सेंट वेलेंटाइन की याद में हुई थी। सर्वप्रथन यह दिन अमेरिेका में ही मनाया गया
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चॉकलेट को पीने की चीज से खाने की चीज बनाने का श्रेय यूरोप को जाता है। आज चॉकलेट सभी की पसंद बनी हुई है और सभी खास अवसरों पर इसका आदान-प्रदान किया जाता है।
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ऋतु आई है फिर बसंत की। हवा हंस रही दिक दिगंत की। सरसों के पीले फूलों ने, मटक-मटक कर शीश हिलाएं।
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शेर सिंह को ठंड लगी तो, लाए एक रजाई। ओढ़ तानकर खूब सोए वे,
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यह एक प्राचीन लोककथा है। ओशो रजनीश ने अपने प्रवचनों में इसे सुनाया था। यह कहानी कई लोगों के अलग अलग तरीके से सुनाई है। यह बहुत ही प्रेरणा देने वाली कहानी है। यदि आप इसे समझ जाते हैं तो यह ज्ञान ही नहीं बहुत अन्य जगहों के लिए भी उपयोगी है। इस कहानी ...
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दाढ़ी के डिब्बे से बंदर, भाग गया लेकर सामान। दाढ़ी उसकी बहुत बड़ी है, अभी-अभी आया है ध्यान।
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