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Swami Dayanand Saraswati Biography : एक महान देशभक्त थे महर्षि दयानंद सरस्वती

सोमवार,फ़रवरी 17, 2020
Swami Dayanand Saraswati
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एक छोटी-सी ज्ञान-गोष्ठी में स्वामी दयानंद के कुछ भक्त बैठे थे। उनमें से एक ने कहा- 'स्वामी जी, जो कुछ मैं पूछना चाहता हूं वह आपके निजी जीवन से संबंध रखता है, इसलिए पूछते हुए संकोच हो रहा है।'
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भारत के एक महान संत एवं विचारक रहे स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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पौराणिक शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। इस दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक आराधना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। आइए जानें कैसे करें पूजन :-
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म मोरबी के पास काठियावाड़ क्षेत्र जिला राजकोट, गुजरात में 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। मूल नक्षत्र में जन्म होने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया ...
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फाल्गुन मास की कृष्ण नवमी गुरु रामदास स्वामी के भक्तों के लिए बहुत महत्व रखती हैं, क्योंकि इसी दिन रामदास स्वामी ने समाधि ली थी। इस वर्ष दास नवमी 17 फरवरी, सोमवार को मनाई जा रही है।
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महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे समर्थ स्वामी रामदास। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। इतना ही नहीं उनके विचारों पर अमल करने से आप स्वयं अपने जीवन की राह आसान बना लेंगे।
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मेरी सिफारिश करके तुमने अच्‍छा नहीं किया, गुरुजी तो हमारे हितैषी हैं। दंड देते हैं तो हमारी भलाई के लिए ही। हम कहीं बिगड़ न जाएं, उनको यही चिंता रहती है।' यह दयानंद आगे चलकर महर्षि दयानंद बने और वैदिक धर्म की स्थापना हेतु 'आर्य समाज' के संस्थापन ...
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कभी आपने सोचा कि शिव प्रतीकों के पीछे का रहस्य क्या है? शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। आओ जानते हैं शिव प्रतीकों के रहस्य...
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धर्म सुधार हेतु अग्रणी रहे दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी और पाखण्ड खण्डिनी पताका फहराकर कई उल्लेखनीय कार्य किए। यही दयानंद आगे चलकर महर्षि दयानंद बने और वैदिक धर्म की स्थापना हेतु 'आर्य समाज' के संस्थापन के रूप में ...
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रामायण काल में मिथिला के राजा जनक थे। उनकी राजधानी का नाम जनकपुर है। जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किलोमीटर दक्षिण पूरब में बसा है। यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है।
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कहा जाता है कि देवी सीता राजा जनक की गोद ली हुई पुत्री थीं...सवाल उठता है कि आखिर माता सीता का जन्म कैसे हुआ था? आइए जानते हैं कथा...
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गजानन महाराज का प्रकटोत्सव 14 से 16 फरवरी 2020 तक मनाया जा रहा है। इसमें 3 दिवसीय कार्यक्रम होंगे, जिसमें श्रीजी का पारायण, चरण पादुका पूजन और भ्रमण तथा जलाभिषेक, कलश पूजन, यज्ञ और इसके बाद भंडारे या महाप्रसादी का वितरण होता है।
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इस प्रार्थना से अभिभूत होकर भगवान महाकाल स्थिर रूप से वहीं विराजित हो गए और समूची अवंतिका नगरी शिवमय हो गई।
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'शिवरात्रि' के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- 'एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग ...
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पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ।
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उसी समय ब्रह्माजी वहां आए और भगवान से कहने लगे- 'रघुनंदन! इसे तो मैंने स्त्री के हाथों मरने का वरदान दिया है। आपका प्रयास बेकार ही जाएगा।
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भगवान् श्रीराम की अर्धांगिनी श्री सीता जी संपूर्ण जगत् की जननी हैं, किंतु कुछ ऐसे भी सौभाग्यशाली प्राणी हैं, जिन्हें अखिल ब्रह्मांड का सृजन, पालन और संहार करने वाली श्री सीता जी
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संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत करने से घर-परिवार में आ रही विपदा दूर होती है, कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य संपन्न होते है तथा भगवान श्री गणेश असीम सुखों की प्राप्ति कराते हैं।
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ब्रह्माजी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के विवस्वान और विवस्वान के वैवस्वतमनु हुए। वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और
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