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paush maas 2020 : पौष माह में हिन्दू व्रत और त्योहार

बुधवार,दिसंबर 11, 2019
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बुधवार, 11 दिसंबर 2019 को दत्त पूर्णिमा अथवा दत्त जयंती मनाई जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि में एक भगवान हुए हैं जिन्हें ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों का स्वरूप माना जाता है।
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स्वामी केशवानंदजी महाराज पवित्र अग्नि (धूनी) के समक्ष ध्यानमग्न होकर बैठे रहते थे, इसलिए लोग उन्हें दादाजी धूनीवाले के नाम से स्मरण करने
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माता अनुसूया ने कहा कि इन तीनों ने मेरा दूध पीया है, इसलिए इन्हें बालरुप में ही रहना ही होगा। यह सुनकर तीनों देवों ने अपने-अपने अंश को मिलाकर एक नया अंश पैदा किया।
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गीता पाठ से भगवान का सानिध्य मिलता है। जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी व्यक्ति को कर्तव्य पथ से विचलित नहीं कर पाती। गीता का अभ्यासी संसार का सच जान लेने के बाद पथभ्रष्ट नहीं होता।
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जिन परिवारों में कलह-क्लेश के कारण अशांति का वातावरण हो, वहां घर के लोग मार्गशीर्ष माह में इन मंत्रों का अधिकाधिक जप करें। अगर पूरे माह इन मंत्रों का जाप नहीं कर सकते हो कम से कम गीता जयंती/मोक्षदा एकादशी के दिन इन मंत्रों का जाप अवश्य करें।
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श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है। गीता मानव मात्र को जीवन में प्रतिक्षण आने वाले छोटे-बड़े संग्रामों के सामने हिम्मत से खड़े रहने की शक्ति देती है।
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भारत में कई चमत्कारिक और ररहस्यमी मंदिर है। उन्हीं में से एक ऐसा मंदिर है जिसके दरवाजे रात अपने आप ही बंद हो जाते हैं और सुबह होते ही खुल जाते हैं। इस मंदिर के संबंध में इसके अलावा और भी चमत्कार जुड़े हुए हैं। हालांकि यह कितना सच है यह कहना मुश्‍किल ...
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डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में 8 से 10 दिसंबर के बीच दुनियाभर के अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रतिष्ठित दार्शनिक, विद्वान, शिक्षाविद और आध्यात्मिक गुरु एकत्रित होंगे। वे यहां पहली बार आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस अद्वैत उत्सव में शामिल होंगे।
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स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 4 दिसंबर 1894 को उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था।
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सपने में कशीदाकारी हुए कपड़े या वस्त्र को देखने पर सुंदर एवं सुशील स्त्री की प्राप्ति हो सकती है।
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मां लक्ष्मी धन की देवी है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। लेकिन कई बार जाने-अनजाने ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिसकी वजह से धन की देवी मां लक्ष्मी घर में प्रवेश नहीं करती। आइए जानते हैं जाने-अनजाने में की गई 5 गलतियों ...
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विवाह पंचमी 1 दिसंबर 2019 दिन रविवार को मनाई जाएगी। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को एक समय व्रत रखकर नागों का पूजन करने वाले मनुष्य की अनेक कामनाएं पूरी हो जाती है।
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विवाह पंचमी इस वर्ष 2019 में 1 दिसंबर को मनाया जाएगा। विवाह पंचमी उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन बहुत खास है, इस दिन भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था। आइए पढ़ें कथा, विवाह पंचमी के दिन कथा पढ़ने, सुनने व सुनाने से वैवाहिक जीवन सुखमय ...
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सुलेमान शरीफ का कहना है कि राम हमारे दिल में हैं। हर तरह का झगड़ा अब खत्म होना चाहिए।
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विवाह पंचमी का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 1 दिसंबर 2019 को है। इस अवसर पर हम आपको बता रहे हैं श्रीरामचरित मानस के अनुसार, श्रीराम ने सीता को पहली कहां और कब देखा था तथा श्रीराम-सीता विवाह का संपूर्ण प्रसंग
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द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है। वर्ष 2019 में गीता जयंती रविवार, 8 दिसंबर को मनाई जा रही है।
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शनि देव के भारत में तमाम मंदिर हैं लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जहां शनि देव साक्षात विराजमान होते हैं। तो चलिए आपको भी स्थानों के बारे में बताते हैं जहां जाकर आप शनि देव दर्शन कर मनचाहा फल प्राप्त कर सकते हैं।
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वि + वाह = विवाह अर्थात अत: इसका शाब्दिक अर्थ है- विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। विवाह को पाणिग्रहण कहा जाता है। दरअसल, विवाह संस्कार हिन्दू धर्म संस्कारों में 'त्रयोदश संस्कार' है।
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शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, आर्श, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच। उक्त आठ विवाह में से ब्रह्म विवाह को ही मान्यता दी गई है बाकि विवाह को धर्म के सम्मत नहीं माना गया है।
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