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125th Birth Anniversary: आजाद भारत के पहले संन्यासी सांसद थे स्वामी ब्रह्मानंद महाराज

मंगलवार,दिसंबर 3, 2019
swami brswami brahmananda maharaj ahmananda ...
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भूथाथ या भूतनाथ अलवर (4203 ईसा पूर्व) बारह अलवरों में से एक है। उनका जन्म महाबलीपुरम में हुआ था। वे भगवान विष्णु के प्रति बहुत समर्पित थे, और हमेशा उनका नाम जपते रहते थे। बाहरी दुनिया से बिना किसी लगाव के केवल उनके बारे में ही सोचते रहते थे। इसलिए ...
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शनिवार, 23 नवंबर 2019 श्री सत्य साईं बाबा का जन्म दिवस मनाया जाएगा। उनका जन्म 23 नवंबर 1926 को आंध्रप्रदेश के पुट्‍टपर्थी गांव में हुआ था।
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मोल्ला (1440–1530) एक तेलगु कवयित्री थी। उन्होंने वाल्मीकि रामायण का संस्कृत से तेलगु में अनुवाद किया है। भगवान शिव की भक्त मोल्ला का जन्म आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के एक गांव में हुआ था। उनके माता पिता भगवान मल्लिकार्जन और श्रीशैलम की देवी ...
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संत तुकडोजी या तुकड़ो जी महाराज का जन्म (1909–1968) महाराष्ट्र के अमरावती जनपद के यावली नामक एक गांव में गरीब परिवार में हुआ था। उन्होंने वहां और बरखेड़ा में अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की। उनके प्रारंभिक जीवन में उन्होंने कई महान संतों से संपर्क ...
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वर्ष 2019 में 8 नवंबर, शुक्रवार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत नामदेव की जयंती मनाई जा रही है।
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स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म मोरबी के पास काठियावाड़ क्षेत्र जिला राजकोट, गुजरात में सन् 1824 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ।
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वैसे महर्षि वाल्मीकि के जन्म से जुड़ी ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन प्रचलित पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वाल्मीकि का जन्म हुआ आश्विन माह में शरद पूर्णिमा के दिन था।
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दधीचि एक ख्यातिप्राप्त महर्षि थे तथा वेद-शास्त्रों के ज्ञाता, परोपकारी और बहुत दयालु थे।
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संत ज्ञानेश्वर का जन्म ई. सन् 1275 में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पैठण के पास आपेगांव में हुआ था।
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अल्लामा प्रभु 12वीं सदी के कन्नड़ संत और एक प्रसिद्ध कवि थे जो स्वयं (आत्मा) के महत्व को समझते थे और वे लोगों को उनकी आत्मा में आध्यात्मिक ऊर्जा भरने और उनकी आत्मा में भगवान के रहने का अनुभव करने के लिए जोर देते थे।
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महान संत पम्बन स्वामिगल

शुक्रवार,अगस्त 16, 2019
पम्बन गुरुदास स्वामीगल, जिन्हें पम्बन स्वामीगल के नाम से भी जाना जाता है, एक महान संत और कवि थे। वे भगवान मुरुगा के अनन्य भक्त थे।
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चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल (1894–1994), जिन्हें कांची या महापरियावा के ऋषि के रूप में भी जाना जाता है, कांची कामकोटि पीठम के 68वें जगद्गुरु थे।
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आदि शंकराचार्य का परिचय

बुधवार,अगस्त 7, 2019
भारत में आदि शंकराचार्य भारतीय दर्शन अद्वैत वेदांत के प्रचारक थे। उन्होंने ब्रह्मसूत्र और भगवद् गीता पर भाष्य लिखे हैं। उन्होंने हिन्दू और बौद्ध धर्म के बीच के अंतर को समझाया जिसमें कहा गया कि हिन्दू धर्म बताता है कि 'आत्मान (आत्मा, स्वयं) का ...
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हमारा देश धर्म और समाज जब-जब नाना प्रकार की परेशानियों में रहा तब-तब संत महापुरुषों ने अपने कर्तृत्व द्वारा उससे राहत दिलाई एवं नई दिशा दी।
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महर्षि व्यास जीवन के सच्चे भविष्यकार हैं। कारण यह है कि उन्होंने जीवन को उसके समग्र स्वरूप में जाना है। जीवन न तो केवल प्रकाश है और न केवल अंधकार!
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17 जून 2019 महान कवि एवं संत कबीर दास की जयंती है। कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं, उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है।
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महान चमत्कारिक और रहस्यमयी गुरु गोरखनाथ को गोरक्षनाथ भी कहा जाता है। इनके नाम पर एक नगर का नाम गोरखपुर और एक जाति का नाम गोरखा है।
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महर्षि भृगु को भी सप्तर्षि मंडल में स्थान मिला है। भृगु ने ही भृगु संहिता की रचना की। उसी काल में उनके भाई स्वायंभुव मनु ने मनु स्मृति की रचना की थी।
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श्री रामानुजाचार्य का जन्म 1017 ई. में दक्षिण भारत के तिरुकुदूर क्षेत्र में हुआ था। बचपन में उन्होंने कांची में यादव प्रकाश गुरु से वेदों की शिक्षा ली।
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