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मौनी अमावस्या है खास, करेंगे ये काम तो बनेंगे मालामाल

मंगलवार,जनवरी 21, 2020
amavasya 2020
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काशी पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मनुष्य को मौन रहना चाहिए और गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों,
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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ कृष्ण एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन श्रीहरि विष्णु और श्री कृष्ण की आराधना करने का विशेष महत्व है।
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प्राचीन काल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया।
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 20 जनवरी, सोमवार को षटतिला एकादशी है। इस दिन काले तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने का अधिक मह‍त्व है। जीवन में हमें कई बार ग्रह, भूत या देव बाधा का सामना करना पड़ता है।
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20 जनवरी 2020, सोमवार को षटतिला एकादशी आ रही है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्‍णु की पूजा का व्रत है। माघ मास की कृष्‍ण पक्ष की एकादशी को यह व्रत किया जाता है।
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सरस्वती का उल्लेख वैदिक साहित्य में एक नदी और एक देवी दोनों रूपों में आता है। बंगाल में विशेष रूप से सरस्वती को पूज्य माना जाता है।
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अत: इस दिन को मां सरस्वती के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, इसलिए मां सरस्वती की पूजा-अर्चना, वंदना की जाती है। इस वर्ष वसंत पंचमी 29 जनवरी 2020, बुधवार को तो
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मां शारदा सुख, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, यश, कीर्ति, पराक्रम, प्रतिभा और विलक्षण वाणी का आशीष प्रदान करती है। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार सरस्वती मंत्र-
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अगर आप मां सरस्वती के मंत्र और श्लोक नहीं जानते हैं तो वसंत पंचमी के दिन इन 11 नामों को 11 बार जपें। यश, विद्या, पराक्रम और बुद्धि के लिए बस यही 11 नाम पर्याप्त हैं। ये नाम असंभव को संभव बना देते हैं।
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वाणी, लेखनी, प्रेम, सौभाग्य, विद्या, कला, सृजन, संगीत और समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली देवी मां सरस्वती से शुभ आशीष प्राप्त करने का दिन है वसंत (बसंत) पंचमी। मां शारदा के पूजन की सरलतम विधि है...
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वसंत पंचमी का शुभ और मंगलकारी पर्व इस बार दो दिन आ रहा है। 29 और 30 जनवरी को सरस्वती देवी की पूजा अर्चना की जाएगी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में इस वर्ष 3 ग्रहों का स्वराशि योग निर्मित हो रहा है। मंगल वृश्चिक राशि पर, गुरु धन में और शनि ...
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चादर एवं तिल का दान करें तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है। आइए जानें आपकी राशि के अनुसार कौन सा दान शुभ है....
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सूर्य संक्रांति में मकर सक्रांति का महत्व ही अधिक माना गया है। माघ माह में कृष्ण पंचमी को मकर सक्रांति देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाई जाती है। आओ जानते हैं कि मकर संक्रांति के बारे में रोचक तथ्‍य।
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मकर संक्रांति के दिन नीचे दिए गए मंत्रों में से जो भी मंत्र आसानी से याद हो सकें उसके द्वारा सूर्य देव का पूजन-अर्चन करें। फिर अपनी मनोकामना मन ही मन बोलें।
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इस संक्रांति को परिधावी संवत्सर में माघ कृष्ण पंचमी रहेगी, योग शोभन और करण तैतिल रहेगा। सिंह राशि में चंद्र और कुंभ लग्न, मकर में सूर्य होंगे। कारण तैतिल है जिसे चर करण कहते हैं। इसका प्रतीक गधा है। इसे अशुभ फलदायी सुप्त अवस्था का करण माना जाता है। ...
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14 जनवरी को शाम 7.53 बजे सूर्य देव धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होगा। इसके चलते पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह श्रेष्ठ रहेगा।
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इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।
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पिछले कुछ वर्षों से कुछ शहरों में पतंगबाजी के खेल में मांजे के उपयोग को बंद करने की मुहिम शुरू हुई है, परंतु उसका असर अभी क्षीण है। यह आवाज इसलिए उठी है कि आसानी से न दिखाई पड़ने वाले मांजे की चपेट में अनेक राहगीर व आकाश में विचरते पक्षी आ जाते हैं। ...
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दक्षिण भारत में 'पोंगल' का हार प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाता है। यह उत्सव लगभग 4 दिन तक चलता है।
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