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कौन है सांता क्लॉज और क्या है जिंगल बेल का सच, जानिए

मंगलवार,दिसंबर 24, 2019
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ईसाई धर्म को क्रिश्‍चियन धर्म भी कहते हैं। इस धर्म के संस्थापक प्रभु ईसा मसीह को माना जाता है। ईसा मसीह को पहले से चला रहे प्रॉफेट की परंपरा का एक प्रॉफेट माना जाता हैं। उन्होंने दुनिया को एक नया नियम दिया और लोगों को प्रेम करना सिखाया। आओ जानते हैं ...
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प्रभु ईसा मसीह का जन्म, जीवन और मृत्यु सभी कुछ रहस्यमयी है। उन्होंने जीवनभर लोगों को प्रेम, दया, क्षमा और सेवा का पाठ पढ़ाया। उनके जीवन पर आज भी शोध होते रहते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि ईसा मसीह पुनर्जीवित होने के बाद भारत चले गए थे लेकिन इसमें ...
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ईसा मसीह किस भाषा में बोलते थे यह सवाल आज भी बरकरार हो सकता है। बाइबल सबसे पहले ग्रीक भाषा में लिखी गई थी, लेकिन उसके पहले प्रेरितों के सुसमाचारों की किताबें हिब्रू में थी और कुछ अन्य भाषाओं में। हालांकि इस पर भी विद्वानों में मतभेद हैं। यह जानना ...
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क्रिसमस को बड़े दिन के रूप में भी मनाया जाता है। क्रिसमस से 12 दिन का उत्सव 'क्रिसमस टाइड' शुरू होता है। 'क्रिसमस' शब्द 'क्राइस्ट्स और मास' दो शब्दों से मिलकर बना है,
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बाइबल या बाइबिल का अर्थ किताब माना गया है। यह ईसाइयों का पवित्र धर्मग्रंथ है। कहते हैं कि बाइबल को ईसा के 200 साल बाद लिखा गया था। हालांकि विद्वानों में इसको लेकर भी मतभेद हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाइबल 40 लेखकों के द्वारा लिखी गई।
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25 दिसंबर सन् 6 ईसा पूर्व को एक यहूदी बढ़ई की पत्नी मरियम (मेरी) के गर्भ से यीशु का जन्म बैथलहम में हुआ। यह भूमि दुनिया भर के ईसाईयों की आस्था का केंद्र है। इसराइल में यह स्थल यरुशलम से 10 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक फिलिस्तीनी शहर है।
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ईसा मसीह के 12 शिष्य थे जिनके नाम इस प्रकार है- 1. पीटर 2. एंड्रयू 3. जेम्स (जबेदी का बेटा) 4. जॉन 5. फिलिप 6. बर्थोलोमियू 7. मैथ्यू 8. थॉमस 9. जेम्स (अल्फाइयूज का बेटा), 10. संत जुदास 11. साइमन द जिलोट 12. मत्तिय्याह। आओ जानते हैं सेंट थॉमस के बारे ...
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मरिया, योसेफ की धर्म पत्नी थी, जो बढ़ई का काम करता था। वे नाजरेथ में रहते थे। एक दिन स्वर्गदूत गाब्रिएल ने उसे दर्शन देकर कहा- 'प्रणाम, कृपापूर्ण, प्रभु आपके साथ है, धन्य हैं आप स्त्रियों में।'
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आखिर परमेश्वर के पुत्र को मनुष्य रूप में इस धरती पर आने की क्या आवश्यकता थी? पढ़ें यीशु मसीह के जन्म के कारण जो पवित्र बाइबिल में हैं
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क्रिसमस ट्री का मूल आधार यह रहा है कि फर वृक्ष की तरह के सदाबहार वृक्ष बर्फीली सर्दियों में भी हरे-भरे रहते हैं।
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ईसा मसीह के 12 शिष्य थे जिनके नाम इस प्रकार है- 1. पीटर 2. एंड्रयू 3. जेम्स (जबेदी का बेटा) 4. जॉन 5. फिलिप 6. बर्थोलोमियू 7. मैथ्यू 8. थॉमस 9. जेम्स (अल्फाइयूज का बेटा), 10. संत जुदास 11. साइमन द जिलोट 12. मत्तिय्याह।
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दुनियाभर में ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशु के जी उठने की याद में 'ईस्टर संडे' मनाते हैं। क्रिसमस के दिन यीशु ख्रीस्त का जन्म हुआ था। ईस्टर के दिन प्रभु यीशु जी उठे थे।
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दुनियाभर में ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशु के जी उठने की याद में ईस्टर संडे (रविवार) मनाते हैं।
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ईस्टर फेस्टिवल वसंत ऋतु में पड़ता है। ईस्टर ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व है। महाप्रभु ईसा मसीह मृत्यु के तीन दिनों बाद इसी दिन फिर जी उठे थे, जिससे लोग हर्षोल्लास से झूम उठे।
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'तुम एक-दूसरे को प्रेम करो, जैसे मैंने तुमसे प्रेम किया है। यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो।'
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ईसाई समाज में गुड फ्रायडे का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुड फ्रायडे का अर्थ है शुभ शुक्रवार।
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इस वर्ष शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019 को गुड फ्राइडे मनाया जा रहा है। गुड फ्राइडे एकमात्र ऐसा दिन है जिसका निर्धारण यहूदी करते हैं। यहूदी फरवरी माह में चांद देखकर इस दिन का निर्धारण करते हैं
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ईसा मसीह ने विरोध और यातनाएं सहते हुए अपने प्राण त्याग दिए उन्हीं की आराधना और वचनों के माध्यम से इंसानियत की राह पर चलने का ज्ञान देने वाला दिन है गुड फ्राइडे।
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यीशु का संपूर्ण जीवन एक ईश्वरीय योजना को पूरा करने के लिए था। उन्हें सलीब पर चढ़ाया जाना कोई अपवाद नहीं है। यीशु को तो पहले से ही ज्ञात था कि ईश्वर की इच्छा क्या है।
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