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वर्ष 2008 का लेखा-जोखा

गुरुवार,जनवरी 1, 2009
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फिर एक बार सलोना अबोध वर्ष अंगड़ाई ले रहा है। आशाओं की मासूम किलकारियाँ गूँज उठी है। शुभ संकल्पों की मीठी खनकती हँसी हर वर्ष की तरह साल 2009 के सुशोभन चेहरे पर भी खिल उठ‍ी है। मानव स्वभाव ही ऐसा है ....
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वर्ष 2008 में राजनीतिक दल भी उठापटक से अछूते नहीं रहे। दक्षिणी राज्य कर्नाटक में भगवा बुलंद कर दिल्ली की सत्ता तक पहुँचने का ख्वाब बुनने वाली भाजपा के लिए यह साल जाते-जाते गहरे जख्‍म दे गया। 'पीएम इन वेटिंग' लालकृष्ण आडवाणी का प्रधानमंत्री बनने का ...
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पेट्रोलियम पदार्थों के खुदरा मूल्य तय करने के मामले में एक अदद फार्मूले की तलाश करते करते वर्ष 2008 भी बीत गया।
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वर्ष 2008 को देश के आर्थिक और वित्तीय जगत में अभूतपूर्व उथल-पुथल के लिए याद किया जाएगा। एक लंबे अर्से के इस वर्ष महँगाई ने गरीब-अमीर सभी को परेशान किया।
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ऐसा पहली बार हुआ है...

बुधवार,दिसंबर 31, 2008
केवल दो दिन से भी कम समय में इतिहास बनने जा रहे वर्ष 2008 में देश-विदेश में बहुत-सी घटनाएँ पहली बार हुईं। इन घटनाओं में कुछ तो एकदम अप्रत्याशित थीं और भविष्य में उनके दोहराव की उम्मीद कम है, लेकिन कुछ घटनाओं को बार-बार होते रहने से रोका नहीं जा
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वर्ष 2008 भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए मानो तुषारापात करने वाला सिद्ध हुआ। शेयर मार्केट बुरी तरह औंधे मुँह गिरा। आर्थिक मंदी ने सारे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। अब मंदी से जूझते लोगों की नजर टिकी हुई है वर्ष 2009 पर कि शायद नया वर्ष बदले ...
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और गिरता चला गया शेयर बाजार

मंगलवार,दिसंबर 30, 2008
शेयर बाजार में कितनी उम्मीदें जगा गया था 2007। बाजार की ऊँची उड़ान से हर तरफ खुशी का आलम था। हर चेहरे पर मुस्कान थी, बाजार में चहल-पहल थी, जेब में पैसा और जुबाँ पर नैनो।
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विचित्र और मजेदार घटनाएँ

मंगलवार,दिसंबर 30, 2008
नई दिल्ली। नए साल 2009 की आहट करीब आने के साथ ही बीतते जा रहे साल 2008 के पन्ने बंद होते जा रहे हैं। 2008 में कुछ ऐसी अजब-गजब बातें हुईं, जिन्हें भुला पाना लगभग नामुमकिन है।
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नई दिल्ली। वर्ष 2008 में हुए आतंकवादी हमलों ने न केवल देश को हिला कर रख दिया, बल्कि सुरक्षा बलों खास कर राजधानी दिल्ली और आर्थिक केंद्र मुंबई दोनों के ही पुलिस बल को गहरी क्षति भी पहुँचाई। दोनों ही शहरों ने अपने कुछ बेहद जाँबाज अधिकारी गँवाए।
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वर्ष 2008 देश के लिए एक ऐसा निर्णायक वर्ष रहा, जब देश ने कई आतंकवादी धमाकों व राजनीतिक उलटफेर के रूप में कई आघात सहे परंतु इतने पर भी यह देश अपने संस्कारों व अपने ज़ज़्बे के कारण उसी हौसले से खड़ा रहा। इस दौर ने देश को जनतंत्र की एक ऐसी आवाज दी, जो ...
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साहित्य के हर क्षेत्र के लिए वर्ष 2008 काफी अहम रहा। इस वर्ष हार्पर कॉलिंस ने हिन्दी प्रकाशन में कदम रखा और हिन्दी में कहानी लिखने वाली स्विस लड़की स्नोवा बार्नो चर्चा में रही।
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साल 2008 के पूरे 365 दिनों की इत्मीनान से खैर-खबर लेने पर पता चलता है वर्षभर इसकी नब्ज ज्यादा अच्छी नहीं चली। कुछ उपलब्धियों को नजरअंदाज किया जाए तो आर्थिक मंदी के खूँखार पंजों के निशान तकरीबन हर तबके पर नजर आए।
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पिछले कुछ वर्षों से तुलना की जाए तो बॉलीवुड के लिए वर्ष 2008 कोई खास नहीं रहा। वर्ष की शुरुआत में जहाँ सितारों को चालीस करोड़, पचास करोड़ रुपए का पारिश्रमिक दिए जाने की बातें सुनाई दे रही थीं, फिल्मों को खरीदने की कीमत सौ करोड़ के ऊपर पहुँच गई थी, ...
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भारत के लिए 2008 एक मिश्रित फलदायी साल रहा है। चाहे हम किसी भी क्षेत्र की बात करें- राजनीति से लेकर तकनीक तक भारत ने अगर कुछ खोया है तो दूसरी ओर बड़ी उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं।
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इसमें कोई संदेह नहीं कि इस वर्ष हमारे देश में धार्मिक कट्टरवाद के चलते आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। धर्म की आड़ में आतंकवाद की नई पौध तैयार हो गई है। तो क्या अब यह जरूरी नहीं कि देश में चल रहे सभी कट्टर
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नववर्ष की नई प्रभात के साथ हम सभी एक नई सोच व नए सपनों को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। इन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए कदम बढ़ाने से पहले हमारे लिए बीते बर्ष का आकलन करना भी नितांत आवश्यक है ....
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वर्ष 2008 जाने को है और 2009 अपनी बाँहें फैलाए नई सुबह का इंतजार कर रहा है। आइए देखें यह नया वर्ष क्या फल लेकर आएगा विभिन्न राशियों के लिए।
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शिक्षा जगत और वर्ष 2008

रविवार,दिसंबर 28, 2008
साल 2008 की शुरुआत में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने घोषणा की थी कि यह साल आधुनिक विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा जनवरी 2008 में विशाखापट्टनम में हुए 95वें साइंस कांग्रेस में की थी।
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बीता साल देश के कला जगत के लिए कई अर्थों में एक अनूठा साल रहा। एक तरफ जहाँ देश के वरिष्ठ कलाकारों ने अपनी सृजनात्मकता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रंग-रूप को प्रतिष्ठित किया बल्कि उसकी चमक को ....
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